| फील लाहयि स्वामी अमरानन्द फील लाहयि जी को स्वामी अमरानन्द के रूप मैं २८ अप्रेल, २००४ को सेडोना अरिज़ोना के अंतर्गत कथेड्राल रक मैं दीक्षित किया गया था. फील ने जो नाम का चयन किया था उसमे वह गुण अंतर्निहित हैं, जो वह बनना चाहते थे और विश्वास करते हैं की परमेश्वर ने उनको अमरानन्द नाम चयन करने के लिये मार्ग दर्शन कियाथा, जिसका मतलब है अनंत या सनातन आनंद. दीक्षा के तुरन्त वाद, फील को यह पता चला की बाबाजी नागराज ने उनको वाकई मैं यह नाम चयन करने के लिये मार्ग दर्शन कियाथा. इस नाम के पांच शब्दांश मैं ‘अः’ है, जो की ईश्वर का सार्वलौकिक पवित्र ध्वनि है. इस नाम मैं स्पेनिष क्रिया ‘अमर’ भी है, मतलब ‘प्रेम करना’. फील को आध्यात्मिक मार्गदर्शन अनेक स्रोत से मिले हैं : जोस सीलभा का 'माइन्ड कन्ट्रोल' अर्थात 'दिमाग़ नियंत्रण' कार्यक्रम, NLP (न्यूरो लिंगुइस्टिक प्रोग्रामिन्ग), लिओनाड अर् और सोंद्रा रे का रिवर्थिन्ग अर्थात पुनर्जन्म प्रक्रिया, ए कोर्स इन मिराकल्स अर्थात अलौकिक कर्मों के लिये पाठ्यक्रम और 'सेल्फ़ रिएलाईजेसन फेलोसीप' (परमहंस योगानन्द के द्वारा स्थापित). हाल ही मैं उन्होने अपने परामर्श दाताओं के सूची मैं ‘टीचिंग्स अफ अब्राहाम’ अर्थात ‘अब्राहाम से सिक्षा’ (एस्टर हिक्स और उनके पति, जेरी के माध्यम से), डा. जेम्स मार्टिन पीबल्स (समर बेकन्स के माध्यम से) और खुद महान श्वास गुरु डेन ब्रुल (www.breathmastery.com) को संयुक्त किया है. स्वामी अमरानन्द जी के जीवन मैं योगानन्द जी का प्रभाव बहत रहा है. उन्होने १२ साल से जादा उस महान योगी के सिक्षा को बहत गहराई से अध्ययन करने मे बितयि है; उनकी हर लेख को बारम्बार पढ़ते थे तथा बड़ी उत्सुकता के साथ दैनिक क्रिया योग का अभ्यास करते थे. योगानन्द जी की पुस्तक ‘अटो बायोग्राफि अफ ए योगी’ ने उनको भारत के अनेक महान गुरुओं के साथ परिचित करवाय था, जेसे ज्ञानावतार श्री युक्तेश्वर, महान योगावतार लहिरी महाशय और अवश्य, महा अवतार, श्री बाबाजी. फील ने अक्तूबर २००२ को मेक्सिको के अन्तर्गत केन्कुन मैं इभोन डिलाफर (स्वामी अमिनन्द) को उह्निके द्वारा आयोजित एक सम्मेलन मैं पहली बार मिले.वहाँ स्वामी अमरानन्द जी का बाबाजी के साथ पहला रहस्यमय अनुभव हुआथा. समय जेसे रुक गया और कमरे मैं सारे लोग बीच मैं ही ठहर गये.बाबाजी तब उनके सामने आये, उनके आँखों मैं आँखें डालके मुस्कुराये, उसके वाद वह लिन होगये और उसके साथ कमरे मैं सब चलने फिरने लगे. यह संबंध असाधारण तरीके से फैलता ही गया. दिसंबर २००४ के पश्चात, युग्म रूप से 'सेक्रेड मेसेजेस फर पेरेन्ट्स अफ दी वल्ड' अर्थात 'जगत के माता-पिता के लिये पवित्र संदेश' (amazon.com, iUniverse.com) लिखने के समय से फील और उनके मित्रों का अनेक ईश्वर समान गुरुओं के साथ विस्मयकारी संबंध का अनुभव नित्य तथा और जल्दी जल्दी होने लगा, उनमे (अंतर से कृतज्ञता तथा सम्मान अर्पण करते हुए) बाबाजी, माताजी, संत जर्मेन, लहिरी महाशय, कुथुमि तथा अन्य शामिल हैं.कोई शब्द इन अविश्वसनीय आदान-प्रदान का वर्णन नहीं कर सकता जो केवल लिखित शब्दों मैं सीमित नहीं रहता, इसमे कृपा तथा ईश्वरीय प्रेम का वास्तविक संचरण होता है. नवंबर २००६ को, बाबाजी ने स्वामी अमरानन्द जी को 'मैत्री समाज' (प्रतिलिपे देखें) नामित एक नूतन स्वामी समाज का संस्थापक बनने के लिये अनुरोध किया.यह समाज अभी ‘सिलभर भायलेट मैत्री स्वामी अडर’ अर्थात 'रजत बेंगनी मैत्री स्वामी समाज’ (www.maitriorder.org) के नाम से जाना जाता है.उसके पश्चात बाबाजी और संत जर्मेन ने (प्रतिलिपि देखें) फील को, महा गुरु स्वामी शिवानंद (टबि अलेग्जान्डर, www.dnaperfection.com) जी को दीक्षित करने के लिये अनुरोध किया और उनके नाम मैं ब्रह्मानन्द जोड़ ने के लिये कहा.यह दीक्षा नवंबर ९, २००६ को सेडोना मैं स्वामी अमरानन्द जी के द्वारा परिचालित हुआ और स्वामी अमिनन्द (इभोन डिलाफर) तथा स्वामी सिरानन्द (सेरेना सुथरलेंड़) प्रत्यक्षदर्शी बने. उसी दिन कुछ समय पहले, होपी लोगों के मुक्ष वुजुर्ग ‘ग्रेन्ड्फादर मार्टिन’ के साथ एक महत्वपूर्ण वैठक के लिये, इन चारों ने होपी लोगों की भूमि (होटभिल्ला) की यात्रा की थी. फील अपने पत्नी जुड़ी(स्वामी नाडिआनन्द) के साथ क्लेरमन्ट, फ्लोरिडा मैं निवास करते हैं.फील का बेटा 'ड्रू' अभी महाविद्यालय के लिये तैयारी कर रहा है.फील के साथ आप amarananda@aol.com के माध्यम से सम्पर्क कर सकते हैं.फील और जुड़ी www.relaxandfindgod.com नामक एक वेबसाइट के परिचारक हैं.
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