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Swami Amenanda |
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स्वामी अमीनन्द इभोन डिलाफर, 'माष्टरि लाइफ ए.सि' के संस्थापक और 'हायर स्कूल फर कनस्यस इभल्युसन' के सह-संस्थापक हैं, वह 'दी पोजिटिव चाइल्ड थ्रु दी लान्गुएज अफ लव' अर्थात 'प्रेम की भाषा मैं से सकारात्मक शिशु', 'माष्टरिन्ग लाइफ' अर्थात 'जीवन जीने मैं निपुणता', 'सेक्रेड मेसेजस फर दी पेरेन्ट्स अफ दी वल्ड' अर्थात 'जगत के माता-पिता के लिये पवित्र संदेश', और 'डिभाइन मदर' अर्थात 'ईश्वर माता के रूप मैं' आदि पुस्तकों के लेखक हैं. वह स्वीकृति प्राप्त 'सम्पुर्ण चेतना के शिक्षक' और स्वीकृति प्राप्त 'पिता-माता का संतानो से उचित सम्पर्क के शिक्षक' हैं और उन्होने 'पवित्र शमनिक पुनर्जन्म', 'बड़ी लंगुएज' अर्थात 'शारीरिक गतिबिधि तथा लक्षण से व्यक्ति को समझना', 'नक्षत्र पुंज से उपचार', 'श्वास से उपचार' आदि अध्ययन किया है, और वह एक रैकी गुरु हैं. उन्होने, BEBA(बेबा) जो की एक निर्लाभ संगठन है और पिता-माता तथा संतानो के मध्य उचित मेल और सम्पर्क के लिये काम करती है, उसमे ५०० घंटे से जादा व्यक्तिगत श्रम-दान किया है. वह The Work with Byron Katie(दी वर्क विथ बैरन कैटी) और Futuring School with Stefan Hermann(फ्यूचरिंग स्कूल विथ स्टीफ़ेन हरमेन) विद्यालय के स्नातक हैं. इभोन, बाबाजी की पुरातन क्रियायोग परंपरा मैं दीक्षित हैं और उन्होने दीक्षा(शक्तिपथ) सीधे श्री बाबाजी से ग्रहण की है...जिनके साथ इभोन की आमने सामने भेंट वर्ष २००३ मैं रिषिकेश, भारत मैं हुइथि. उनका 'स्वामी अमिनन्द' के रूप मैं भी दीक्षा हुआ, अमिनेई नाम से उनके मित्र उनको प्रेमवत पुकार ते हैं, यह नाम उन्होने बाबाजी नागराज की सीधे अनुरोध से ग्रहण की है. वह 'सीलभर भयोलेट मैत्री स्वामी अडर' अर्थात 'रजत बैंगनी मैत्री स्वामी समाज' से दीक्षित हैं – http://www.maitriorder.com. २००६ मैं, उन्होने 'ट्रान्सेडेन्टल रिवर्थिन्ग मेथड™' अर्थात 'अन्तर्ज्ञान से पुनर्जन्म प्रक्रिया' की सृजन की, यह प्रक्रिया से सम्पुर्ण सत्ता की चेतना मैं परिवर्तन तथा प्रतिभामय पुनर्जन्म होती है. इभोन वर्तमान, अपने दो सन्तान और प्रियतम तथा जीवन साथी, 'टबि अलेग्जान्डर' के साथ 'सान्ता बार्वरा' मैं निवास करते हैं. उनके नये पुस्तक 'दी स्पिरिचुअल फेस अफ अटिजम' अर्थात 'दिमागी असंतुलित बच्चों के अध्यात्मिक रूप', 'दी अस्सेनसन एसिस्टेड प्रोग्राम™' अर्थात 'स्वर्गारोहण के प्रक्रिया मैं सहायता कार्यक्रम' और 'दी रिवर्थ अफ ह्युमनिटि©' अर्थात 'मानवता का पुनर्जन्म' २००८ और प्रारम्भिक २००९ मैं प्रकाशित होन्गे. |
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