जूडी लाहयी स्वामी नडिआनन्द जैसे मैं अपनी कंप्यूटर के सामने बैठके, अपनी आध्यात्मिक यात्रा को शब्दो मैं ढालने की कोशिश कर रही हूँ, मैं बहत सारे घटनाओं को याद कर रही हूँ, जो मुझे यहाँ तक लाने के लिये प्रकट हुए थे...इस वर्तमान तक !मैं यहाँ तक कैसे पहुंची... इतने सारे प्रज्वलित आत्माओं के विच मैं जिनकी सेवा मुझे विनम्र बनाती है ?....अमरानन्द, अमिनन्द, शिवानन्द....और अन्य बहत सारे सुंदर आत्मा जो की हमारे संयुक्त परिवार के हिस्सा हैं....वह जो मानवता और ईश्वर समान गुरुओं की एसी निस्वार्थता....एसी स्वछन्दता....एसी उल्लास.... के साथ सेवा करते है... तो...यह कह सकती हूँ....मैं वरदान स्वरूप जीवन तमाम 'प्रकाश गुंफा' देखती आ रही हूँ....सत्य और रोशनी की वह झलकें जिनकी मैं दर्शन करती हूँ और उनको ईश्वर के अनुरूप उचित समय मैं प्रकट होने के लिये छोड़ देती हूँ.कब?अब !!! और कब ? मेरे अपने, मनोहर प्रियतम, फील(अमरानन्द) ने मुझको "अटो वायोग्राफि अफ ए योगी," पुस्तक से परिचित करवाया था और मुझे समझ मैं आगया की मैं सच्चा ज्ञान के समक्ष हूँ. मैं इन चिह्नो के पिछे चलती गयी जो मुझे घर पहुंचाएंगे, मेरी सितारों तथा उनसे आगे तक का चक्रवाई उड़ान प्रारम्भ हुआ....मेरी रोशनी की झलकें दीप्तिमान चिंगारिओं की बौछार मैं फूटने लगी और एक साथ होके तरल सुनहरा प्रकाश ढालने लगी जिससे हम सब की उत्पत्ति होती है.
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