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स्वामी शिवानन्द ब्रह्मानन्द

DNA Perfection (डि एन ए परफेक्सन)

 

टबि अलेग्जान्डर चिकित्सा सहायक के रूप में २५ साल से जादा काम कर चुके हैं.वह अन्तर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु हैं, रैकी मे पारन्गम, आत्मा बुद्धि मन चिकित्सक, दूर चिकित्सा विशेषज्ञ, 'हायर स्कूल फर कनस्यस इभल्युसन ©' के सह संस्थापक और ‘Great Master’(ग्रेट मास्टर) अर्थात ‘महान गुरु’ पुस्तक के लेखक( ११/११/०७ तक उपलब्ध).वह बाबाजी की पुरातन क्रिया योग मार्ग मैं दीक्षित हैं और उन्होने दीक्षा(शक्तिपथ) सीधे बाबाजी से ग्रहण की थी.महास्वामी शिवानन्द ब्रह्मानन्द के रूप मैं मैत्री बैंगनी-रजत रज्जु समाज(http://www.maitriorder.com) मैं दीक्षित हुएथे.उनके द्वारा दिये गये शिक्षा तथा अधिबेशन प्रेम भाव से पूर्ण, भय-मुक्त होते हैं, और उर्जा प्रवाह के रुकावटें जो हमारी उच्चतर व्यक्तित्व, अर्थात हमारी उस स्तर की चेतना जो उच्चतर आयामो में रहती है, को धारण करने मैं वाधा डालती है उनको दूर करने मैं केंद्रित होते हैं.वह इस कार्य को हमारी प्रभाज्योति की आसक्तियाँ, कार्मिक छापों को दूर करने के वाद DNA( डि एन ए) की शुप्त अंशो को सक्रिय करके सम्पन्न करते हें.हमारी हृदय चक्र की बाधाओं को दूर करने मैं तथा लोगों को स्वयं से अप्रतिवन्धित प्रेम को सक्रिय करने मैं भी वह निपुण हैं क्यूंकी उनको यह लगता है की अभी इस ग्रह मैं यह सबसे महत्वपुर्ण कार्य है.एक अभिभावक के रूप मैं टबि 'एन्जेलिक ह्यूमन' अर्थात 'दिव्य मानव' और 'इन्डिगो' जातियों की सूक्ष्म बारीक़ियाँ, उनकी DNA(डि एन ए), और बिशेष रूप से एकदिश उर्जा के माध्यम से किस तरह अपने बाधाओं को वैद्युतिक तरीके से अलग किया जा सकता है, और अपने सुप्त क्षमताओं को सक्रिय किया जा सकता है वह समझते हैं.वह सारी दुनियाँ के लोगों के साथ काम करते हैं, आमने सामने कार्यशाला की माध्यम से, अथवा दूर से विडिओ सम्मेलन की द्वारा, चिकित्सा प्रणाली मै सहायता करते हैं और उन्नत प्रशिक्षण देते हैं.उनका मुक्ष उद्देश्य है पृथ्वी का स्वर्गारोहण और मानवीय १२ तंतु वाली प्रारंभिक DNA(डि एन ए) की क्षमता को वापस लाने मै सहायता करना जिसके द्वारा हम पृथ्वी के साथ २०१२ मै स्वर्गारोहण करसकेंगे.

 

मैं दूसरों को उनके प्रभुत्व प्राप्त करने मैं सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित हूँ, इसमे मेरा स्वर्गीय प्रेम द्वारा प्रवर्तित सर्वोच्च अभिप्राय है, उर्जा प्रवाह के सारे बाधाओं को दूर करने से सारि मानव जाति अपनी उच्चतर व्यक्तित्व को चयन कर पायेगि, इस तरह से सभी अपनी आत्मा के उद्देश्य को जियेंगे, और वही करेंगे जो यहाँ असल मैं वह करने के लिए आये हें.

- टबि अलेग्जान्डर

 

'The Great Master' (दी ग्रेट माष्टर) अर्थात 'महान गुरु' पुस्तक का परिचय तथा कुछ अंश, अनुसूचित निर्मोचन दिवस ११/११/०७:


सृष्टि से पहले कर्म करना था
सितम्बर ४, २००६
११:११ पूर्वान्ह रायो डि जनेरियो, ब्राज़ील

मेरे प्रियतम,


बचन के अनुसार मैं तुम्हारे सामने हूँ, महान कर्म करने वाले भ्रातृ-वृंद से संदेश है, और तुम्हारा चयन हुआ है, आपको लिखित रूप से एक द्वार का निर्माण करना है जो उनके पास पहुँच सकती है जिनका अन्तरात्मा का जागरण पृथ्वी ग्रह मे प्रकट हो रहे घटनाओं के लिये परम आवश्यक तथा निर्णायक है.

तुम्हे आज अपने उच्चतर चुक्ति के कुछ अंश पूर्ण करने हैं तथा और अधिक जीवों की सेवा करनी है ना केवल उनकी DNA(डि एन ए) को सक्रिय करके बल्कि उनकी महान गुरु बनने की आन्तरिक इच्छा को जागृत करना है.प्रेम तथा ज्ञान के सारे तन्तु उनकी सम्पुर्ण क्षमता मैं पुनः जागृत होने के लिये तैयार हैं.तुम्हारा लक्ष है, तुम जो हो उसके सारे उप-परमाणविक और आधी-परमाणविक आयामों मैं, हम जो तुमको देंगे उसको सबसे सर्वोच्च रूप मैं धारण करना.

 

आपने अपने अन्तर के महान गुरु को जगा लिया है, और यह विनम्रता, सामर्थ्य, सत्यता तथा प्रेम है जो आपको महान गुरु के महान कर्म के सोपानो से गुजरने के लिये मार्ग दर्शन करेगी, वह महान गुरु जो आप हैं जो वास्तब मैं ईश्वर का ब्रह्म उपस्थिति है.तथापि तुम्हारा वास्ताबिक लक्ष है दूसरों को इस महान कर्म के लिये दीक्षा देना तथा यहाँ पृथ्वी मैं भ्राता तथा भगिनियों को लेके एक श्वेत संघ का निर्माण करना.

मैं तुमसे अनुरोध करता हूँ मेरे बेटे, की तुम इस भेंट को स्वीकार करो जो हम तुम्हे दे रहे हैं और मैं उन सबसे, जो यह वार्ता ग्रहण कर रहे हैं उनको हाँ बोलने के लिये अनुरोध करता हूँ.अपने ईश्वर विश्वास के द्वार खोलो और स्वयं को अपने भाग्य की बिधाता बनने के लिये आज्ञा दो, वह एक, जो यह 'महान कर्म' को लक्ष मैं रखके चलता है और सांस लेता है.

आपके लिये प्रिय शिवानन्द जी, ध्यान मैं रखें की आपको सारे वार्ताओं को सांस मैं लेना है और उनके उपर ध्यान करना है.यह तीन द्वार मैं से पहला द्वार है जो की आप महान श्वेत भ्रातृ-संघ से ग्रहण करेन्गे.

क्यूँ के स्रुष्टि से पहले कर्म था, वह कर्म था सांस लेना, और वह श्वास शब्द बना, और वह शब्द मानसिक दुनियाँ से परे , निरन्तर प्रसारित हो रही मूल चेतना मैं प्रतिबिम्बित होके 'दी ग्रेट माष्टर' अर्थात 'महान गुरु' बनि.

 

जब तुम इस द्वार के अंदर का महान कर्म को धारण करोगे, ध्यान मैं रखना मेरे बच्चों, की मानवीय अनुभूति के सारे स्तर तत्काल प्रभावित होन्गे : शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक, आत्मिक और सूक्ष्म.दृष्टिकोण, अभिव्यक्ति, विश्लेषण और अन्तर्ज्ञान तुम सब पर उच्च से उच्चतर लेहरायेन्गि जेसेही तुम सारे सोपान तथा सारी बिधियाँ जो हम तुमको दे रहे हैं मेरे बेटे उनमे से होके जाओगे, यह वास्तविकता के सूक्ष्म कणो मैं जो कुछ भी हैं उनको जगायेगि, स्वर्गीय शक्तिपथ को सक्रिय करेगी और अंत मैं विश्वास जगायेगि की हम सब सृष्टि के सह-स्रष्टा हैं और वास्तबीकता के महान वास्तुकार हैं.क्यूँ के जो तुम सोच ते हो और विश्वास करते हो, तुम उसी उर्जा मैं रुपान्तरित होगे.

महान कर्म मैं पुनः तुम्हारा स्वागत है...
यह केवल प्रारम्भ है
श्री बाबाजी


 

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